
तीसा चंबा। उपमंडल तीसा में आधा पशु डिस्पेंसरी बंद होने की कगार पर है। इन डिस्पेंसरियों में स्थायी स्टाफ न होने के कारण पशुपालकों को उचित सुविधाएं नहीं मिल रही हैं। प्राप्त जानकारी के मुताबिक टेपा, देहरा, भराड़ा, बघेईगढ़, प्रितमास और चरड़ा स्थित पशु डिस्पेंसरियां राम भरोसे चल रही हैं। इन डिस्पेंसरियों में पिछले दो साल से स्थायी कर्मचारी नहीं है। टेपा स्थित डिस्पेंसरी मात्र एक चतुर्थ श्रेणी कर्मी के हवाले है, जबकि चार डिस्पेंसरियों में एक भी कर्मचारी नहीं है। इन डिस्पेंसरियों में डेपुटेशन पर फार्मासिस्ट व चपरासी भेजे जाते हैं। डिस्पेंसरियों में स्टाफ न होने के कारण चार पंचायतों के करीब 60 गांवों में सैकडों पशुपालाकों को पशुओं का उपचार करवाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। स्थानीय निवासी रूप लाल, निक्कू राम, हेमराज, प्यार दीन, विवेक, रमेश कुमार, प्रवीन कुमार, अशोक कुमार, राकेश, होशियार सिंह, चंद राम, ज्ञान चंद, मुलख राज, साहणू राम, ध्यान चंद और चूनी लाल ने बताया कि डिस्पेंसरियों में चल रही स्टाफ की कमी के कारण उन्हें पशुओं का इलाज करवाने के लिए तीसा जाना पड़ता है। इस कारण उन्हें काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि डिस्पेंसरियों में रिक्त पड़े पदों को भरने के बारे में कई बार पशुपालन विभाग व प्रदेश सरकार के नुमाइंदों को अवगत करवाया गया, लेकिन आज तक कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। उन्होंने पशुपालन विभाग से मांग की है कि डिस्पेंसरियों में रिक्त पड़े फार्मासिस्ट व चिकित्सक के पदों को जल्द भरा जाए। इससे किसानों को काफी सहुलियत मिलेगी। उधर, डा. अजय कुमार ने बताया कि इस बारे में पशुपालन विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवा दिया गया है।
